कब तलक रहूँ तन्हा

एक ज़िंदान में है दिल मेरा
क्या रहूँगा मैं उम्र भर तन्हा?
कोई मुझसे वफ़ा करेगा क्या?
मेरी तक़दीर से लड़ेगा क्या?
मैं किसी की दुआ बनूँगा क्या?
किसी के दिल में मैं रहूँगा क्या?
देख ले मुझमें अपनी दुनिया कोई
मेरे जैसा रहे न तन्हा कोई
उसकी आँखों में हो झलक मेरी
करती जाए जो कम झिझक मेरी

हर तरफ़ मेरे जिसकी ख़ुश्बू है
इल्म है मेरी जाँ कि वो तू है
एक ही तो है आरज़ू माँ की
क्या तू बन जाएगी बहू माँ की
भटका याँ-वाँ तलाश में तेरे
देख ले छाले पाँव के मेरे
सबसे अव्वल तो है अकेलापन
है नहीं दुख भी बाँटने का फ़न
साथ दो पल मेरे बिता ले अब
दो कदम ही सही बढ़ा ले अब
आख़िरश कब तलक रहूँ तन्हा
तुझको किस हक़ से मैं कहूँ अपना

- अच्युतम यादव 'अबतर'