इतनी बरकत मुझे अता न करो
करना भी हो तो बारहा न करो
वो तुम्हारे ही राह की हों तो ठीक
हर मुसीबत का सामना न करो
तोड़ कर देखना जो कुछ भी मिले
रिश्तों में ऐसा बचपना न करो
अपनी मंज़िल पे मैं पहुँचता नहीं
मेरे नक़्श-ए-पा पे चला न करो
हिज्र से मुझको मर ही जाने दो
मेरे इस दर्द की दवा न करो
कुछ तो ख़ुद्दारी है अँधेरों में
रौशनी भीक में लिया न करो
- अच्युतम यादव 'अबतर'
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